बिना मातृभाषा की उन्नति के देश का गौरव कदापि वृद्धि को प्राप्त नहीं हो सकता। - गोविंद शास्त्री दुगवेकर।

इश्तिहार | लघु-कथा

"मेरा बहुत सा क़ीमती सामान जिसमें शांति, सद्‌भाव, राष्ट्र-प्रेम, ईमानदारी, सदाचार आदि शामिल हैं - कहीं गुम गया है। जिस किसी सज्जन को यह सामान मिले, कृपया मुझ तक पहुँचाने का कष्ट करे।

आपका अपना,
भारत बनाम हिंदोस्तान "

#

- रोहित कुमार 'हैप्पी'
  संपादक, भारत-दर्शन, न्यूज़ीलैंड

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 1

k
kuldeep Kumar Suri kuldeepkumarsuri63@gmail.com
11-Nov-2014 16:03
हार्ट टचिंग .

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।