बिना मातृभाषा की उन्नति के देश का गौरव कदापि वृद्धि को प्राप्त नहीं हो सकता। - गोविंद शास्त्री दुगवेकर।
इश्तिहार | लघु-कथा
"मेरा बहुत सा क़ीमती सामान जिसमें शांति, सद्भाव, राष्ट्र-प्रेम, ईमानदारी, सदाचार आदि शामिल हैं - कहीं गुम गया है। जिस किसी सज्जन को यह सामान मिले, कृपया मुझ तक पहुँचाने का कष्ट करे।
आपका अपना,
भारत बनाम हिंदोस्तान "
#
- रोहित कुमार 'हैप्पी'
संपादक, भारत-दर्शन, न्यूज़ीलैंड
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 1
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)