देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

इन्सान

एक दिन वो नगर के कई लोगों से मिला।

सबने अपने-अपने नाम बताकर परिचय दिया ।

लेकिन उसे बेहद कोफ़्त हुई ।

'कि काश! कोई तो कह देता यार!'

- मैं क्या हूँ? कौन हूँ? क्यों पूछते हो?
हूँ तो सिर्फ इन्सान ही!

- अजना अनिल [साक्षात्कार]

 

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