मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज्जत करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे।
इन्सान
एक दिन वो नगर के कई लोगों से मिला।
सबने अपने-अपने नाम बताकर परिचय दिया ।
लेकिन उसे बेहद कोफ़्त हुई ।
'कि काश! कोई तो कह देता यार!'
- मैं क्या हूँ? कौन हूँ? क्यों पूछते हो?
हूँ तो सिर्फ इन्सान ही!
- अजना अनिल [साक्षात्कार]
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