हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।

चार हाइकु

जूते ठाट के -
जैसे बड़े लाट के,
आज के राजे।

झूठ, सफ़ेद -
हो या कि कजरारे ,
वारे ही न्यारे!

ऊंचे मकान,
लगते बियवान!
लोग नहीं हैं !!

बर्दी बेदर्दी,
कहर बरपाए,
हद कर दी।

- तपेश
ई-मेल: tapeshbhowmick@gmail.com

 

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