मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज्जत करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे।
गोरख पांडेय की दो कविताएं
आँखें देखकर
ये आँखें हैं तुम्हारी
तकलीफ़ का उमड़ता हुआ समुन्दर
इस दुनिया को
जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए।
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उनका डर
वे डरते हैं किस चीज से डरते हैं वे
तमाम धन-दौलत गोला-बारूद पुलिस - फ़ौज के बावजूद ?
वे डरते हैं कि एक दिन
निहत्थे और ग़रीब लोग
उनसे डरना
बंद कर देंगे।
- गोरख पांडेय
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