हमारी नागरी दुनिया की सबसे अधिक वैज्ञानिक लिपि है। - राहुल सांकृत्यायन।

गैर

मुझे अपने आप पर शक होने लगा है। मैं कोई और हो गया हूँ।

-जोगेंदर पाल 
[संपादक – बलराम, भारतीय लघुकथा कोश (भाग-2), दिनमान प्रकाशन,  1990]

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