भाषा का निर्माण सेक्रेटरियट में नहीं होता, भाषा गढ़ी जाती है जनता की जिह्वा पर। - रामवृक्ष बेनीपुरी।

एक बार फिर...

वो
चला तो ठीक था
लोग कहते थे
इसमें
शक्ति है/बुद्धि है
और चातुर्य भी
ये जीत जायेगा
दौड़ अपनी,
पर क्या हुआ ?
गंतव्य से पहले ही
शायद
वो भटक गया
उसकी सब विशेषताएं
उड़ गई
सूखे पत्तों की तरह
या फिर
भूल गया वो
कि वह एक
विशेष कार्य को निकला था
वो अटक गया
राह की चकाचौंध में
और चटक गया
उसका लक्ष्य
शीशे की तरह...
दौड़ का समय
पूर्ण होने को है
अबकी बार
खरगोश सोया तो नहीं
अति आत्मविश्वास में
यहां वहां घूमता रहा
लगता है
एक बार फिर
कछु आ
जीत जायेगा
दौड़ अपनी ...

- व्यग्र पाण्डे
कर्मचारी कालोनी, गंगापुर सिटी, स.मा.(राज.) 322201
ई-मेल: vishwambharvyagra@gmail.com

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