देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।

मीठी वाणी | बाल कविता

छत पर आकर बैठा कौवा,
कांव-कांव चिल्लाया ।
मुन्नी को यह स्वर ना भाया,
पत्थर मार भगाया

तभी वहां पर कोयल आई,
कुहू-कुहू चिल्लाई 

उसकी प्यारी-प्यारी बोली,
मुनिया के मन भाई ।

मुन्नी बोली प्यारी कोयल,
रहो हमारे घर में ।
शक्कर से भी ज्यादा मीठा,
स्वाद तुम्हारे स्वर में ।

मीठी बोली वाणी वाले,
सबको सदा सुहाते ।
कर्कश कड़े बोल वाले कब,
दुनिया को हैं भाते !

-प्रभुदयाल श्रीवास्तव

pdayal_shrivastava@yahoo.com

 

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।