अंग्रेजी के माया मोह से हमारा आत्मविश्वास ही नष्ट नहीं हुआ है, बल्कि हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान भी पददलित हुआ है। - लक्ष्मीनारायण सिंह 'सुधांशु'।

बेटी

आक्रोश घेर रहा था दीवारों में...परन्तु दीवारे इतनी मज़बूत थी...कभी निकल ना पाओ...कभी रह ना पाओ!!
दर्द भी जेब में खनक रहा था, सर और शरीर दोनों टूटने को तैयार थे ...!

बहुत मज़ा आ रहा था अहंकार को....द्वेष को...क्लेश को। इंसान टूट चुका था..आँखे नम थी.. फिर वापस याद आयी बेटी...! ..और वो कमाने निकल पड़ा..

- केतन कोकिल
  ई-मेल: ketan.kokil@gmail.com

 

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