देशभाषा की उन्नति से ही देशोन्नति होती है। - सुधाकर द्विवेदी।
बेधड़क दोहावली
गुस्सा ऐसा कीजिए, जिससे होय कमाल ।
जामुन का मुखड़ा तुरत बने टमाटर लाल।।
भारत की सरकार का, खूब गर्म है खून।
मुंह से निकली बात जो, वही बनी कानून।।
नहीं जानती श्रीमती, बाहर का कुछ हाल।
साड़ी जो न मिली उन्हें, कर बैठी हड़ताल।।
कवि सम्मेलन में कटी, है होली की रात।
मेंढक गण हर्षित हुए रंगों की बरसात।।
- बेधड़क बनारसी
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)