राष्ट्रभाषा हिंदी का किसी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है।' - अनंत गोपाल शेवड़े

बे-कायदा

जब भी मैं
जागने की
कोशिश करता हूँ
सो जाता हूँ।
पर अक्सर
जागता हूँ
जब भी बाकायदा
सोने की
कोशिश करता हूँ।
यह बात
सीधे तौर पर
मुझे समझाती है
कि जीवन
बाकायदा नहीं
अपनी ही
मरजी से
चलता है।

--माया मृग
[शब्द बोलते हैं]

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।