मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज्जत करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे।
काश हम जंगल में रहते
काश कि हम जंगल में रहते
पेड़ों पर झटपट चढ़ जाते
आम पेड़ से तोड़ के खाते
बाघ और भालू दोस्त बनाते
बंदर से भी यारी होती
ये यारी भी प्यारी होती
तोता मैना ,बगुला मोर
हम सब खूब मचाते शोर
-रवि रंजन गोस्वामी
ई-मेल: goswamirr@hotmail.com
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