हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।
बदला हुआ मौसम
अचानक हिंदी पर गोष्ठियां, सम्मेलन व तरह-तरह के समारोह आयोजित होने लगे थे। हिंदी नारे बुलंदियो पर थे। सरकारी संगठनो से साठ-गांठ के ताबड़तोड़ प्रयास भी जोरों पर थे।
इन दिनों 'अंग्रेज़ी' भी 'हिंदी' बोलने लगी थी। मौसम बदला-बदला महसूस हो रहा था। कुछ बरसों में ऐसा मौसम तब आता है जब 'विश्व हिंदी' सम्मेलन आने वाला होता है।
- रोहित कुमार 'हैप्पी'
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