मैं दुनिया की सब भाषाओं की इज्जत करता हूँ, परन्तु मेरे देश में हिंदी की इज्जत न हो, यह मैं नहीं सह सकता। - विनोबा भावे।

अधूरी बातों की चुभन

ये जो मेरी बात
पूरी होने से पहले ही
काट देते हो न…
बस यहीं
मेरी कई बातें
हमेशा के लिए
अधूरी रह जाती हैं।
शब्द ठहर जाते हैं
कंठ पर
भावनाएँ मुड़ जाती हैं
भीतर कहीं
और मैं मुस्कानों की सिलाई में
अपने दर्द के धागे छिपा लेती हूँ।
मुझे पता है
तुम्हें बोलने की जल्दी है
पर क्या कभी जल्दी
समझने की भी उतनी ही होती है?
कभी सुना है
किसी के भीतर की वह खामोशी
जो हर बार टूटती है—
बात काटे जाने पर?
तुम्हें लगता है
मैं रुक गई
पर सच तो यह है
कि मेरी कई बातें
तुम्हारे बीच में आ जाने से
कभी जन्म ही नहीं ले पातीं।
कहते हो—
“कहो न, क्या बात है?”
पर मैंने कहना
धीरे-धीरे छोड़ दिया
क्योंकि तुम्हें सुनना
कभी आया ही नहीं।
किसी दिन
अगर सच में सुनना चाहो—
तो मत बोलना
बस थोड़ी देर ठहर जाना
शब्दों को पूरा होने देना।
शायद उस दिन
मैं तुम्हें
उन अधूरी बातों का संसार दिखा दूँ—
जो तुमने ही
अधूरा रखा है।

-नील मणि
ई-मेल : mail2neelmani@gmail.com

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