व्यंग्य क्षणिकाएँ

रचनाकार: मिश्रीलाल जायसवाल

उल्लू वाहनी

जब लक्ष्मी आती है 
तिजोरियां 
भर जाती है 
उल्लू भी 
अपने करतब 
दिखाता है 
हर शाख पर 
बैठ जाता है

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छांटन

लम्बे अरसे तक
मगजमारी के बाद 
उनकी रचनाएं फिल्मों में 
स्थान पा रही हैं 
पत्रिकाओं द्वारा 
अस्वीकृत रचनाएं
काम आ रही हैं

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मंचीय कवि

उन्होंने
मंचीय कवि बनने की
ठानी है
पीना सीख लिया है
कविता भर
बनानी है

—मिश्रीलाल जायसवाल
[आजकल, 1985]