बैताल ने कहा--राजन्, ये आदमी मशीन क्यों बना रहा है?
राजन्-- समय और श्रम को बचाने के लिये
बैताल-- या आदमी को अतीत बनाने के लिये?
बैताल-- राजन्, टकसाल में रात-दिन सिक्के क्यों ढाले जा रहे हैं?
राजन्-- विनिमय को सुलभ बनाने के लिये
बेताल-- या आदमी की आवाज दबाने के लिये?
बैताल-- राजन् ये लोग कपड़े फेंककर कहां भागे जा रहे हैं?
राजन्-- ये सभ्यता की हंसती हुई दौड़ में शामिल होने
बैताल-- या अपने अकेलेपन पर फूट-फूटकर रोने?
बैताल-- राजन्, बच्चा भूख से बिलख रहा है ये मां उसे अपने स्तनों का दूध क्यों नहीं पिलाती?
राजन्-- यौवन को चिरनवीन रखने के लिये
बैताल-- या भविष्य को भूखा रखकर
वर्तमान के हाथों बिकने के लिये?
बैताल-- राजन्, ये पर्वतों के पीछे उजाला कैसा है?
राजन्-- बैताल, ये विस्फोट का धमाका है
पर्वतों के अहम को काटने के लिये
बैताल-- या आदमी को अंधापन बांटने के लिये?
बैताल-- राजन् दरख्तों के साये से दूर
ये लोग शहर की तरफ क्यों भागे जा रहे हैं?
राजन्-- बैताल, वहां पसीने के भाग्य जगते हैं
बैताल-- या ये दरख्त सलीब लगते हैं?
बैताल-- राजन्, आज आदमी को ईश्वर की तलाश क्यों है?
राजन्-- अपना पता लगाने के लिये
बैताल-- या मिल जाये तो उसका गला दबाने के लिये?
-माणिक वर्मा