धर्मपाल महेंद्र जैन प्रवासी हिंदी साहित्य के एक प्रतिष्ठित और सशक्त हस्ताक्षर हैं। 1952 में मध्य प्रदेश के झाबुआ (रानापुर) में जन्मे श्री जैन वर्ष 2002 से कनाडा के नागरिक हैं और टोरंटो में रहकर हिंदी साहित्य को वैश्विक मंच पर समृद्ध कर रहे हैं।
शैक्षणिक योग्यता
आपकी शिक्षा बहुआयामी रही है, जिसमें आपने भौतिकी (M.Sc.), अर्थशास्त्र (M.A.) एवं हिंदी (M.A.) में उच्च शिक्षा प्राप्त की है। विज्ञान और कला का यह समन्वय आपके लेखन में स्पष्ट झलकता है।
प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ
आपकी रचनाओं ने व्यंग्य, उपन्यास और कविता विधाओं में नए आयाम स्थापित किए हैं:
उपन्यास: ‘इमिग्रेंट’ (आईसेक्ट पब्लिकेशन)।
व्यंग्य संकलन (08): ‘साहित्य की गुमटी’, ‘गणतंत्र के तोते’, ‘डॉलर को नोट’ (केंद्रीय हिंदी संस्थान द्वारा प्रकाशित), ‘भीड़ और भेड़िए’ (भारतीय ज्ञानपीठ एवं वाणी प्रकाशन), ‘इमोजी की मौज में’, ‘दिमाग वालो सावधान’, ‘सर क्यों दाँत फाड़ रहा है’ एवं ‘चयनित व्यंग्य रचनाएँ’।
कविता संकलन (04): ‘अधलिखे पन्ने’, ‘फ्राइडे इविनिंग’, ‘कुछ सम कुछ विषम’ एवं ‘इस समय तक’।
सहभागिता: तीस से अधिक साझा संकलनों में आपकी रचनाएँ सम्मिलित हैं।
अकादमिक उपस्थिति (पाठ्यक्रमों में)
आपका साहित्य न केवल पढ़ा जाता है, बल्कि शोध और अध्ययन का विषय भी है:
एम.ए. (हिंदी): इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (रेवाड़ी), मराठवाड़ा विश्वविद्यालय (औरंगाबाद) तथा अमरावती विश्वविद्यालय के प्रवासी साहित्य पाठ्यक्रम में आपकी रचनाएँ सम्मिलित हैं।
बी.कॉम. (अनिवार्य हिंदी): नागपुर विश्वविद्यालय के स्नातक पाठ्यक्रम का हिस्सा।
आलोचनात्मक कार्य: आपके रचनाकर्म पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकें—‘धारदार धर्मपाल’ (संपा. आर.पी. तोमर, 2025) एवं ‘कनाडा के प्रवासी साहित्यकार धर्मपाल महेंद्र जैन की रचनाधर्मिता’ (2024)—प्रकाशित हो चुकी हैं।
प्रमुख सम्मान
साहित्य विभूषण सम्मान (2024): बीपीए फाउंडेशन एवं इंडिया नेट बुक्स द्वारा।
सेतु उत्कृष्टता सम्मान (2023): सेतु, पिट्सबर्ग (अमेरिका)।
व्यंग्य भूषण सम्मान (2023): इंडिया नेट बुक्स, नई दिल्ली।
रीड एक्सीलेंस अवॉर्ड (2020): व्यंग्य संग्रह ‘इमोजी की मौज में’ पर।
शांति-गया स्मृति कृति सम्मान (2019): काव्य संग्रह ‘इस समय तक’ पर।
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मोबाइल: (001) 416 225 2415
ईमेल: dharmtoronto@gmail.com