रणविजय राव
रणविजय राव समकालीन हिंदी साहित्य के एक सशक्त हस्ताक्षर हैं, जो कवि, कथाकार और व्यंग्यकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। बिहार के औरंगाबाद जिले के मूल निवासी श्री राव की उच्च शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज से संपन्न हुई है।
साहित्यिक कृतियाँ एवं सृजन
अब तक आपकी 10 पुस्तकें प्रकाशित होकर व्यापक चर्चा बटोर चुकी हैं। आपकी लेखनी में विविधता का अनूठा संगम है:
प्रमुख कृतियाँ: काव्य संग्रह ‘जब तुम नहीं होती’ और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (NBT) से प्रकाशित लोक आस्था पर केंद्रित पुस्तक ‘अर्घ्यदान की बेला’ आपकी अत्यंत लोकप्रिय कृतियाँ हैं।
नवीनतम प्रकाशन: हाल ही में विश्व पुस्तक मेले में आपके रेखाचित्र संग्रह ‘जड़ें बरगद की’ का लोकार्पण हुआ है। साथ ही, व्यंग्य संग्रह ‘लोकतंत्र की चौखट पर रामखेलावन’ वर्तमान में साहित्यिक गलियारों में विशेष चर्चा का विषय है।
अन्य कार्य: आपके खाते में एक लघुकथा संग्रह, बिहार की लोककथाओं का संकलन, व्यंग्य संकलन और दो संपादित काव्य संग्रह भी शामिल हैं।
पुरस्कार एवं सम्मान
साहित्य और संस्कृति के प्रति आपके समर्पण के लिए आपको अनेक प्रतिष्ठित अलंकरणों से विभूषित किया गया है:
प्रमुख सम्मान: राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त विशिष्ट पुरस्कार, अटल रत्न अवार्ड, राजीव गांधी रत्न अवार्ड, और विद्या धाम (USA) द्वारा 'संस्कृति संवाहक अवार्ड'।
विशिष्ट पहचान: 'राही रैंकिंग' में आप लगातार दो वर्षों से स्थान बनाए हुए हैं। इसके अतिरिक्त आपको शोभना सम्मान, बिलासा सम्मान, व्यंग्य महारथी पुरस्कार और छठ सेनानी अवार्ड से भी नवाजा गया है।
मीडिया एवं मंच
आपने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर काव्य पाठ किया है। दूरदर्शन, आकाशवाणी, जस टीवी सहित विभिन्न राष्ट्रीय समाचार पत्रों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर आपके साक्षात्कार एवं रचनाएँ निरंतर प्रसारित होती रहती हैं।
साहित्यिक गतिविधियों के साथ-साथ आप भारतीय संसद (लोकसभा सचिवालय) में संयुक्त निदेशक के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, आप आकाशवाणी के समाचार सेवा प्रभाग में समाचार संपादन कार्य से भी संबद्ध हैं।