डॉ पिलकेन्द्र अरोरा
डॉ पिलकेन्द्र अरोरा: व्यक्तित्व एवं कृतित्व
साहित्यकार डॉ. पिलकेन्द्र अरोरा हिंदी जगत के चर्चित व्यंग्यकार, प्रखर समीक्षक और विचारक हैं। मूलतः वाणिज्य के प्राध्यापक रहे डॉ. अरोरा की लेखनी में अर्थशास्त्र की सटीकता और व्यंग्य की धार का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
जन्म: 24 मार्च 1957, उज्जैन (मध्य प्रदेश)
शिक्षा: विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से एम.कॉम. एवं अर्थशास्त्र में पीएच.डी.
पेशा: पूर्व वाणिज्य प्राध्यापक।
प्रमुख प्रकाशित कृतियाँ (व्यंग्य संग्रह)
अब तक आपके आठ व्यंग्य संग्रह प्रकाशित होकर चर्चा बटोर चुके हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
• ‘साहित्य के प्रिंस’
• ‘पाठक देवो भव’
• ‘साहित्य के अब्दुल्ला’
• ‘लिफाफे का अर्थशास्त्र’
• ‘श्री गूगलाय नमः’
• ‘चयनित व्यंग्य’
• ‘साहित्य रहस्यम्’
• ‘स्ट्रेट ड्राइव’
संपादन कार्य
आपने व्यंग्य विधा के दस्तावेजीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है:
• साक्षात् व्यंग्यकार: राष्ट्रीय स्तर के शीर्षस्थ व्यंग्यकारों से सीधी बातचीत पर आधारित
• व्यंग्यप्रदेश: मध्य प्रदेश के रचनाकारों पर केंद्रित विशेष संपादन
सिख इतिहास एवं दर्शन पर कार्य:
व्यंग्य के साथ-साथ धर्म, दर्शन और इतिहास में आपकी गहरी अभिरुचि है। सिख इतिहास पर आपके विशेष अध्ययन के फलस्वरूप सात पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं:
• ‘युगस्रष्टा गुरु नानक देव’
• ‘युगद्रष्टा गुरु गोबिंद सिंह’
• ‘युगरक्षक गुरु तेग बहादुर’
• ‘युगग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब: स्वरूप एवं दर्शन’
सम्मान एवं उपलब्धियाँ
साहित्यिक अवदान के लिए आपको अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया है:
• शरद जोशी कृति पुरस्कार (2021): मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी द्वारा।
• माणिक वर्मा व्यंग्य सम्मान: मध्य प्रदेश लेखक संघ द्वारा।
• विभिन्न टीवी चैनलों और आकाशवाणी केंद्रों से आपकी व्यंग्य वार्ताओं का निरंतर प्रसारण होता रहता है।
संपर्क: 61/15 'आभार', आजादनगर, उज्जैन (म.प्र.) मोबाइल: +91 98934-41760