नूतन वर्षाभिनंदन | फणीश्वरनाथ रेणु की नव वर्ष पर कविता

रचनाकार: फणीश्वरनाथ रेणु

नूतन का अभिनंदन हो
प्रेम-पुलकमय जन-जन हो!

नव-स्फूर्ति भर दे नव-चेतन
टूट पड़ें जड़ता के बंधन;

शुद्ध, स्वतंत्र वायुमंडल में
निर्मल तन, निर्भय मन हो!

प्रेम-पुलकमय जन-जन हो,
नूतन का अभिनंदन हो!

प्रति अंतर हो पुलकित-हुलसित
प्रेम-दिए जल उठें सुवासित

जीवन का क्षण-क्षण हो ज्योतित,
शिवता का आराधन हो!

प्रेम-पुलकमय प्रति जन हो,
नूतन का अभिनंदन हो!

-फणीश्वरनाथ रेणु
[कवि रेणु कहे, संपादक : भारत यायावर, राजकमल प्रकाशन,1988]