यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।

आत्म-निर्भरता

 (कथा-कहानी) 
Print this  
रचनाकार:

 भारत-दर्शन संकलन | Collections

एक बहुत भोला-भाला खरगोश था। उसके बहुत से जानवर मित्र थे।  उसे आशा थी कि वक्त पड़ने पर मेरे काम आएँगे।

एक दिन शिकारी कुत्ते उसके पीछे पड़ गए। वह दौड़ता हुआ गाय के पास पहुँचा और कहा-आप हमारी मित्र है, कृपा कर अपने पैने सींगों से इन कुत्तों को मार दीजिए। गाय ने उपेक्षा से कहा-मेरा घर जाने का समय हो गया। बच्चे इन्तजार कर रहे होंगे, अब मैं ठहर नहीं सकती।

तब वह घोड़े के पास पहुँचा और कहा-मित्र घोड़े! मुझे अपनी पीठ पर बिठाकर इन कुत्तों से बचा लो। घोड़े ने कहा-मैं बैठना भूल गया हूँ, तुम मेरी ऊँची पीठ चढ़ कैसे पाओगे?

अब वह गधे के पास पहुँचा और कहा-भाई, मैं मुसीबत में हूँ, तुम दुलत्ती झाड़ने में प्रसिद्ध हो, इन कुत्तों को लाते मारकर भगा दो। गधे ने कहा घर पहुँचने में देरी हो जाने से मेरा मालिक मुझे मारेगा। अब तो घर जा रहा हूँ। यह काम किसी फुरसत के वक्त करा लेना।

फिर वह बकरी के पास पहुँचा और उससे भी वही प्रार्थना की। बकरी ने कहा जल्दी भाग यहाँ से, मैं भी मुसीबत में फँस जाऊँगी। तब खरगोश को समझ आई कि दूसरों का आसरा तकने से नहीं, अपने बल-बूते से ही अपनी मुसीबत पार होती है, तब वह पूरी तेजी से दौड़ा और एक घनी झाड़ी में छिपकर उसने अपने प्राण बचा लिये।

[भारत-दर्शन संकलन]

Back
 
Post Comment
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश