राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिंदी ही जोड़ सकती है। - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

आनन्द विश्वास के हाइकु

 (काव्य) 
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रचनाकार:

 आनन्द विश्वास (Anand Vishvas)

1.
मन की बात
सोचो, समझो और
मनन करो।

2.
देश बढ़ेगा
अपने दम पर
आगे ही आगे।

3.
अपना घर
तन-मन-धन से
स्वच्छ बनाएं।

4.
पहरेदार
हटे, तो काम बने
हम सब का।

5.
पानी या खून
हर बूँद अमूल्य
मत बहाओ।

6.
गेंहूँ जौ चना
कैसे हो और घना
हमें सोचना।

7.
हमने माना
पानी नहीं बहाना
तुम भी मानो।

-आनन्द विश्वास

 

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