यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।

ज्ञान

 (कथा-कहानी) 
Print this  
रचनाकार:

 स्वामी विवेकानंद

एक बार स्वामी विवेकानंद ने अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस से पूछा, "बहुत-से पंडित अनेक शास्त्रों का पाठ करते हैं। वेद-पाठ में ही संपूर्ण जीवन बिता देते है तथापि उन्हें ज्ञान-लाभ क्यों नहीं होता?"

स्वामी जी ने हँसते हुए उत्तर दिया, "चील, गिद्ध आदि पक्षी उड़ते तो बहुत ऊँचाई पर हैं, लेकिन उनकी दृष्टि पृथ्वी पर पड़े मांस के टुकड़ों पर ही रहती है। ठीक उसी प्रकार वेद-शास्त्रों एवं ग्रंथों का पाठ करने से क्या लाभ होगा? यदि मन हमेशा सांसारिक वस्तुओं की ओर ही लगा रहे।"

[भारत-दर्शन संकलन]

 

Back
 
Post Comment
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश