भाषा विचार की पोशाक है। - डॉ. जानसन।

मौज-मस्ती के पल भी आएंगे | ग़ज़ल

रचनाकार: राजगोपाल सिंह
रेटिंग: 0/5 (0 मत)

मौज-मस्ती के पल भी आएंगे - राजगोपाल सिंह की ग़ज़ल | Hindi Ghazal by Rajgopal Singh

मौज-मस्ती के पल भी आएंगे
पेड़ होंगे तो फल भी आएंगे

आज की रात मुझको जी ले तू
चांद-तारे तो कल भी आएंगे

चाहतें दोस्ती की पैदा कर
रास्ते तो निकल भी आएंगे

आइने लाए जाएंगे जब तक
लोग चेहरे बदल भी आएंगे

अजनबी बादलों से क्या उम्मीद
आए तो ले के जल भी आएंगे

- राजगोपाल सिंह

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।