रामकुमार आत्रेय हिंदी लघु-कथा के सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपकी रचनाएं दैनिकपत्रों व पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं। हम यहाँ आत्रेयजी की लघु-कथाएं प्रकाशित कर रहे हैं और हमें विश्वास है कि पाठकों को इनकी रचनाएं सदैव की भांति पसंद आएंगी।
हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)