हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।

सीधा-सादा 

सीधा-सादा सधा सधा है 
इसी जीव का नाम गधा है
इसपर कितना बोझ लदा है 
पर रहता खामोश सदा है 
ढेंचू ढेंचू कह खुश रहता 
नहीं शिकायत में कुछ कहता 
काम करो पर नहीं गधे-सा
नाम करो पर नहीं गधे-सा

-शेरजंग गर्ग 
[इक्यावन बाल कविताएँ, 2009, आत्माराम एंड संस, दिल्ली]

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