राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है। - महात्मा गाँधी।

क्षणिका

ना तुमने कुछ कहा, ना हमने कुछ कहा।
बस यूँ ही बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुने
अपनी अपनी खामोशी में
सभी कुछ तो कह गए हम दोनों।

-डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड 
 न्यूज़ीलैंड

 

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