हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना

क्षणिका

 (काव्य) 
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रचनाकार:

 डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड | न्यूज़ीलैंड

ना तुमने कुछ कहा, ना हमने कुछ कहा।
बस यूँ ही बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुने
अपनी अपनी खामोशी में
सभी कुछ तो कह गए हम दोनों।

-डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड 
 न्यूज़ीलैंड

 

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