राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

रवि

रवि | रबीन्द्रनाथ टैगोर को समर्पित मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियाँ

अस्त हो गया है तप-तप कर प्राची, वह रवि तेरा।
विश्व बिलखता है जप-जपकर, कहाँ गया रवि मेरा?

- मैथिलीशरण गुप्त
  [रबीन्द्रनाथ टैगोर को समर्पित मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियाँ] 

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