राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिंदी ही जोड़ सकती है। - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'

कोई नहीं होगा साक्षी

 (काव्य) 
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रचनाकार:

 प्रीता व्यास | न्यूज़ीलैंड

पत्थर के नहीं हैं
ये मेरे- तुम्हारे रिश्ते
की चोट सह लें
किरच-किरच हो जायेंगे
देखो, कांच के रिश्ते हैं ये
खुद को सम्हालो
कहीं टूट जाये
और कोई टुकड़ा
पाँव तले आ गया
तो फर्श लाल हो जायेगा
और तुम्हारी
इस तकलीफ का साक्षी
कोई नहीं होगा।

-प्रीता व्यास
 न्यूज़ीलैंड

 

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