हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।

मुक़ाबला

दमदार ने
पूरे दम से
जान लड़ा दी
मंज़िल पाने को,

और...
दुमदार ने केवल दुम हिला दी
मंज़िल हथियाने को।

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

 

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।