यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।
छन्नूजी (बाल-साहित्य )    Print this  
Author:प्रभुद‌याल‌ श्रीवास्त‌व‌ | Prabhudyal Shrivastava

दाल भात रोटी मिलती तो,
छन्नू नाक चढ़ाते।
पूड़ी परांठे रोज रोज ही,
मम्मी से बनवाते।

हुआ दर्द जब पेट,रात को,
तड़फ तड़फ चिल्लाये।
बड़े डॉक्टर ने इंजेक्शन,
आकर चार लगाये।

छन्नूजी अब दाल भात या,
रोटी ही खाते हैं।
पूड़ी परांठे दिए किसी ने,
गुस्सा हो जाते हैं।

- प्रभुदयाल श्रीवास्तव

 

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