रामकुमार आत्रेय हिंदी लघु-कथा के सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपकी रचनाएं दैनिकपत्रों व पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं। हम यहाँ आत्रेयजी की लघु-कथाएं प्रकाशित कर रहे हैं और हमें विश्वास है कि पाठकों को इनकी रचनाएं सदैव की भांति पसंद आएंगी।
राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिंदी ही जोड़ सकती है। - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'
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