राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है। - महात्मा गाँधी।

क्षणिकाएँ

कहा-सुनी

तुमने कहा, हमने सुना। 
हमने कहा, तुमने सुना। 
बस बात वहीं ख़त्म हो गई।

-डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड 
 न्यूज़ीलैंड


#


सफ़ाई

तुमने कहा, 
अपनी सफ़ाई में कुछ कहना है?
हमने सुना, 
उस पर विचार किया।
फिर जवाब दिया-- 
जब सफ़ाई देने की ही नौबत आ गई 
तो फिर,
कहने को रह ही क्या गया?

-डॉ पुष्पा भारद्वाज-वुड 
 न्यूज़ीलैंड

प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी आप करें!

टिप्पणी लिखें (Write a Comment)

CAPTCHA

मेरी पसंदीदा रचनाएँ

आपने अभी तक कोई रचना सहेज कर नहीं रखी है।