मुस्लिम शासन में हिंदी फारसी के साथ-साथ चलती रही पर कंपनी सरकार ने एक ओर फारसी पर हाथ साफ किया तो दूसरी ओर हिंदी पर। - चंद्रबली पांडेय।

प्रेम देश का... | ग़ज़ल 

प्रेम देश का... | Ghazal by Dr Rana Pratap Singh Rana Ganauri

प्रेम देश का ढूंढ रहे हो गद्दारों के बीच
फूल खिलाना चाह रहे हो अंगारों के बीच

खतरनाक है इनके साए में चलना भी दोस्त
भरा हुआ बारूद ना होवे दीवारों के बीच

मनोयोग से ध्यान लगाए जरा बैठ कर देख
शायद सिसकी सच की सुन ले तू नारों के बीच

ईश्वर तेरी करुणा ही अब इसकी खैर करे
एक मसीहा घिरा हुआ है हत्यारों के बीच

दिल की बात जुबां पर आ कर रुक जाती है क्यों
शायद गैर कोई बैठा है हम यारों के बीच

मद्धम लौ वाले तारों से हुआ नहीं आलोक
कोई चांद सजाना होगा इन तारों के बीच

दुःखों में भी घिरकर 'राणा' हँसते रहना सीख
देख कि गुल हँसता रहता है नित खारो के बीच

-डॉ राणा प्रताप सिंह 'राणा' गन्नौरी

 

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