हिंदुस्तान की भाषा हिंदी है और उसका दृश्यरूप या उसकी लिपि सर्वगुणकारी नागरी ही है। - गोपाललाल खत्री।

कुछ हाइकु (काव्य)

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Author: डॉ विद्या विंदु सिंह

बुलाओ मुझे
पुआल के बिछौने 
सोना चाहूँ मैं।

स्वप्न-कटोरे
भरी भरी आँखों से
छलक गए।

काँटों का वन
कैसे पार करूँ मैं
फूलों सा मन।

जो चाहे कहो
हमें सुन लेने दो
रोम-रोम से।

अपना घर
धरती पर नहीं
कहाँ बसूँ मै।

-डॉ विद्या विंदु सिंह 

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