नागरी प्रचार देश उन्नति का द्वार है। - गोपाललाल खत्री।

तीन तरह के लोग (काव्य)

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Author: प्रदीप चौबे

इस देश में
तीन तरह के लोग रहते है
एक-- खून-पसीना बहाने वाले,
दूसरे-- पसीना बहाने वाले,
तीसरे-- खून बहाने वाले,
खून-पसीने वाला
रिक्शा चलाता है,
पसीने वाला
घर चलाता है
और खून बहाने वाला
देश चलाता है।
रिक्शेवाला
मजदूर होता है,
घरवाला
मजबूर होता है
और देश चलाने वाला
मशहूर होता है।

-प्रदीप चौबे

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