विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक दासता है। - वाल्टर चेनिंग

उत्तम जीवन | बाल कथा (बाल-साहित्य )

Print this

Author: भारत-दर्शन संकलन

गरुड़ पक्षियों का राजा है। ऊँचे आकाश में वह विहार करता है। बेचारी मधु-मक्खी, छोटी-सी जान! दिन भर इधर-उधर भटककर रस इकट्ठा करती है। एक बार जब गरुड़ पानी पीने पृथ्वी पर उतरा, दोनों की भेंट हुई।

गरुड़ बोला--"मधुमक्खी, तेरा भी क्या जीवन है? वसंत ऋतु-भर तू डाल-डाल और फूल-फूल पर मारी-मारी फिरती है। बूंद-बूंद रस जमा कर छत्ता लगाती है, वह भी दूसरों के लिये! मेरा जीवन देख, ऊँचे आकाश में सदा विचरता रहता हूं। कोई भी पक्षी मुझसे ऊँचा या तेज नहीं उड़ सकता। मैं जब चाहूं, जिसके हाथ में से उसका आहार छीन लूं।"

मधु-मक्खी ने उत्तर दिया--"ठीक है, महाराज! यह ऊँचा पद आप ही को शुभ हो। मुझे इसका लोभ नहीं कि ऐसी ऊँची उड़ूँ या दूसरों का आहार छीन-कर खाऊँ। मुझे तो परिश्रम करना ही भला लगता है। कठिन परिश्रम कर मैं मधु इकट्ठा करूँ, और वह दूसरों के काम आए, इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है?"

वास्तविक महत्ता बल-कीर्ति अथवा किसी से जबर्दस्ती छीन लेने में नहीं है। साधारण, सरल जीवन अपनाकर परोपकार करना और ऐसा करने में जो श्रम पड़े, उसे हँसते-हँसते झेलना, यही सच्चा बड़प्पन है।

Back

 
Post Comment
 
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश