हिंदी के पुराने साहित्य का पुनरुद्धार प्रत्येक साहित्यिक का पुनीत कर्तव्य है। - पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल।

याद  (काव्य)

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Author: डॉ. अनुराग कुमार मिश्र

नदी के किनारे ढलती शाम के साये में
स्कूटर पर उनका कुछ सहम कर बैठना। 

कभी कानों से सटकर रुकने को कहना
कभी पीठ पर उंगलियों से कुछ लिखना। 

हवाओं के रुख पर वो जुल्फों का उड़ना
जूड़े में कसना औ फिर उनका खुलना। 

सब्जियों के खेतों पर मन का मचलना
कभी मुझे टोकना कभी खुद सम्हलना। 

बहुत याद आता है साथ उनका चलना
हाथ कन्धे पे रखकर चढ़ना - उतरना। 

डॉ. अनुराग कुमार मिश्र
ई-मेल : dranuragmishra3@gmail.com

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