दक्षिण की हिंदी विरोधी नीति वास्तव में दक्षिण की नहीं, बल्कि कुछ अंग्रेजी भक्तों की नीति है। - के.सी. सारंगमठ

एम्स के निर्माण की कहानी  (विविध)

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Author: रोहित कुमार 'हैप्पी'

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स /AIIMS) से तो आप परिचित होंगे! इसके निर्माण की कहानी भी कम रोचक नहीं। इसकी स्थापना में न्यूज़ीलैंड की भी विशेष भूमिका थी। 

इसकी आधारशिला 1952 में रखी गयी और इसका सृजन 1956 में संसद के एक अधिनियम के माध्‍यम से एक स्‍वायत्त संस्‍थान के रूप में किया गया।

1952 में भारत आर्थिक संकट में था। भारत सरकार के पास पैसा नहीं था। उस समय इसकी फंडिंग न्यूज़ीलैंड के माध्यम से हुई। उस समय भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और स्वास्थ्य मंत्री राजकुमारी अमृतकौर के प्रयासों से एम्स का निर्माण संभव हो पाया। 

AIIMS DELHI

इसके निर्माण में भारत की प्रथम महिला केंद्रीय मंत्री राजकुमारी अमृत कौर का विशेष योगदान रहा है। भारत की स्वाधीनता के पश्चात् राजकुमारी अमृत कौर जवाहरलाल नेहरू के प्रथम मंत्रिमंडल में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बनीं। 1950 में वह विश्व स्वास्थ्य संगठन की अध्यक्ष चुनी गई। यह पद सँभालने वाली भी वह पहली महिला थीं और प्रथम एशियाई महिला भी। स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए उन्होंने भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए अनेक प्रयास किए। नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है। इस संस्थान की स्थापना के लिए उन्होंने अनेक देशों से आर्थिक सहायता प्राप्त की। न्यूजीलैंड ने भी पूरा सहयोग किया। 

न्यूज़ीलैंड की सरकार ने उस समय एक मिलियन पाउंड की आर्थिक सहायता दी थी। उस समय यह रुपयों में एक करोड़ 33 लाख रुपए हुए थे। उस समय इसका नाम All India Institute Of Medical Sciences के स्थान पर The All India Medical Institute उल्लिखित है। 4 अप्रैल 1952 को इसकी आधारशिला न्यूज़ीलैंड के उद्योग और व्यापार मंत्री जे. टी वॉट्स ने रखी थी।

दिल्ली का एम्स 1956 में बनकर तैयार हो गया। आश्चर्य की बात है कि जब भारत तंगी के दौर में था और आधुनिक स्वास्थ्य की जानकारी भी जब सरल सुलभ नहीं थी, उस समय केवल 4 वर्ष में दिल्ली का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS/All India Institute Of Medical Sciences) बनकर तैयार हो गया था। वर्तमान में अन्य नगरों में निर्मित एम्स को औसतन 10 वर्ष लगते हैं।

इस बारे में न्यूज़ीलैंड के भारतीय मूल के सांसद डॉ गौरव शर्मा ने भी अप्रैल 2021 में एक ट्वीट किया है। इससे पहले सितंबर 2020 में प्रसून वाजपेयी ने भी अपने एक कार्यक्रम में एम्स के निर्माण में न्यूज़ीलैंड की भूमिका का उल्लेख किया था।

-रोहित कुमार 'हैप्पी'

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