हिंदी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीं किया। - राजेंद्रप्रसाद।

शब्द-चित्र काव्य (विविध)

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Author: रोहित कुमार 'हैप्पी'

निम्न शब्द-चित्र काव्य में प्रत्येक पंखुड़ी में एक अक्षर है और चित्र के मध्य में 'न' दिया हुआ है।

शब्द-चित्र काव्य

पंखुड़ियों में दिए हर अक्षर में यदि आप दूसरा वर्ण ‘न' जोड़ते जाएँ तो शब्द बनते जाएंगे। प्रत्येक शब्द का दूसरा वर्ण ‘न' है। इसे ऊपर की मध्य पंखुड़ी 'नै' से आरंभ करें। नै +न = नैन, इसी प्रकार बा + न = बान इत्यादि। इस प्रकार प्रत्येक शब्द में दूसरा अक्षर ‘न' जोड़कर पढ़ने से निम्नलिखित दोहा बनता है--

नैन बान हन बैन मन, ध्यान लीन मन कीन।
चैन है न दिन रैन तन, छिन छिन उन बिन छीन॥

साहित्यशास्त्र में काव्य के तीन भेद हैं - 'ध्वनि', गुणीभूत व्यंग्य और चित्र। इनमें से चित्रकाव्य के भी दो भेद होते हैं। एक अर्थ-चित्र और दूसरा शब्द-चित्र। अर्थ-चित्र में अर्थ की विचित्रता रहती है और शब्द-चित्र में पद रचना अहम् है। उपर्युक्त चित्र 'शब्द-चित्र' का ही एक उदाहरण है।

प्रस्तुति : रोहित कुमार 'हैप्पी'

[मूल चित्र : गुरुनारायण सुकुल,  आलंकारिक उक्तियाँ ] 

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