हिंदी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीं किया। - राजेंद्रप्रसाद।

तितली  (बाल-साहित्य )

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Author: दयाशंकर शर्मा

देखो देखो तितली आई,
सबके दिल को हरने आई।
हरे बैंगनी पर है इसके,
मन को नहीं लुभाते किसके॥
इस डाली से उस डाली पर,
फूल सूँघती फुदक फुदक कर।
बाग़ बगीचों में यह रहती,
सब बच्चों के मन को हरती ॥

-दयाशंकर शर्मा
[बालसखा, फरवरी 1934]

 

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