हिंदी चिरकाल से ऐसी भाषा रही है जिसने मात्र विदेशी होने के कारण किसी शब्द का बहिष्कार नहीं किया। - राजेंद्रप्रसाद।

सड़क पर बह निकली पुस्तक-गंगा (विविध)

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Author: भारत-दर्शन समाचार

कनाडा का टोरोंटो शहर। बात 2016 की है। यहाँ की एक मुख्य सड़क पर हजारों पुस्तकें बिछा दी गईं। सड़क ऐसे जान पड़ती थी जैसे कि वहाँ पुस्तकों की बाढ़ आ गई हो। थोड़ी ऊंचाई से देखने पर ऐसा प्रतीत होता था जैसे यह एक पुस्तकों की नदी हो।

Book River

कनाडा में हर वर्ष ‘नुई ब्लाश' नामक एक उत्सव मनाया जाता है। फ़्रेंच में इसका अर्थ ‘सफेद रात' या ‘जगमगाती हुई रात' होता है। यह उत्सव समकालीन कला पर केंद्रित होता है। रात भर चहल-पहल बनी रहती है। शहर के सारे म्यूजियम और आर्ट-गैलरीज रात भर खुली रहती है। ये उत्सव शाम को 6:00 बजे से लेकर अगले दिन सुबह 6:00 बजे तक रहता है। हर वर्ष लोग इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं। एक रात के लिए पूरा शहर किसी एक बड़े मंच की तरह सजाया जाता है, सड़कों को काला-दीर्घा में परिवर्तित कर दिया जाता है। विभिन्न प्रकार के गीत-संगीत, नाटक, नृत्य के अतिरिक्त रात भर खान-पान उपलब्ध रहता है।

इसी उत्सव में 2016 में शहर की सबसे व्यस्त सड़क से होने वाले शोर और प्रदूषण का विरोध करने के लिए कुछ कलाकारों ने एक युक्ति अपनाई। उन्होंने इस सड़क पर किताबें बिछानी शुरू कर दी। कुल मिलाकर 10,000 किताबें सड़कों पर बिछा दी गई। ये सभी किताबें ‘ द साल्वेशन आर्मी' नामक एक संस्था ने दानस्वरूप दी थी। सड़क के किनारे पैदल चलते लोग इन पुस्तकों को उठा सकते थे। वे अपनी पसंद की पुस्तक ले सकते थे या वहीं बैठकर भी पढ़ सकते थे। ऐसा करने से कम से कम एक रात के लिए तो उस सड़क पर यातायात नहीं चला। इस प्रकार प्रदूषण को पुस्तकों के माध्यम से रोक दिया गया। लोगों ने पैदल घूम-घूमकर अपनी मनपसंद किताबें पाईं और चाव से पढ़ी। देखते ही देखते कुछ घंटों में एक-एक करके पुस्तकें कम होने लगीं और अगले दिन सड़क फिर से सुचारु रूप से चलने लगी।

इस कारनामे स्पेन के कलाकारों के एक समूह ‘लुज़िन्त्तरप्तस' (Luzinterruptus) ने। सड़क पर पुस्तकों की यह बाढ़ तो अगले दिन ही समाप्त हो गई लेकिन इन कलाकारों का यह कलात्मक विरोध यानी 'सड़क पर बहने वाली यह पुस्तक-गंगा' वाली घटना बहुत लंबे समय तक याद की जाएगी।

प्रस्तुति : भारत-दर्शन समाचार

 

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