हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।
नववर्ष पर.. | अमिता शर्मा की नव वर्ष पर कविता
नव उमंग दो नव तरंग दो
नव उत्साह दो नव प्रवाह दो
शुभ संकल्पों से सुवासित
जीवन में जीवन भर दो ।
पावनता से अभि सिंचित हो
जीवन बगिया का हरपल प्रमुदित
कुछ जीवट हो कुछ हो उमंग
जीवन की डगमग नैया को
तुम आज अभय वर दो!
- अमिता शर्मा
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