हिंदी उन सभी गुणों से अलंकृत है जिनके बल पर वह विश्व की साहित्यिक भाषाओं की अगली श्रेणी में सभासीन हो सकती है। - मैथिलीशरण गुप्त।
काश! नए वर्ष में | हलीम 'आईना' की नव वर्ष पर कविता
काश! नए वर्ष में
ऐसा हो जाए।
कुर्सी हथियाने के बाद भी
हर एक सत्ताधारी
चुनाव पूर्व वाली
विनम्रता दिखलाए ।
काश! नए वर्ष में
ऐसा से जाए,
किसी ग़रीब के हिस्से का
कौर हड़पने
कोई तौंदिया न आए ।
काश! नए वर्ष में
ऐसा से जाए,
कोई भी ट्यूशनख़ोर द्रोणाचार्य
अपने चहेते अर्जुनों की ख़ातिर
किसी एकलव्य का अँगूठा न कटवाए ।
काश! नए वर्ष में
ऐसा से जाए ।
- हलीम 'आईना'
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