राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूँगा है। - महात्मा गाँधी।

तेरा हँसना कमाल था साथी | ग़ज़ल

तेरा हँसना कमाल था साथी
हमको तुमपर मलाल था साथी

दाग चेहरे पे दे गया हमको
हमने समझा गुलाल था साथी

रात में आए  तेरे  ही  सपने
दिन में तेरा ख़याल था साथी

उड़ गई नींद मेरी रातों की
तेरा कैसा सवाल था साथी

करने बैठे थे दिल का वो सौदा
कोई आया दलाल था साथी

- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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