भाषा देश की एकता का प्रधान साधन है। - (आचार्य) चतुरसेन शास्त्री।
झूठ के साए में | ग़ज़ल
झूठ के साए में सच पलते नहीं
हम किसी कातिल से हैं डरते नहीं
हर बड़ी इच्छा हैं वो पाले हुए
और कुछ भी तो करम करते नहीं
वक्त ने कुंदन बनाया हो जिसे
वो किसी भी आग से डरते नहीं
वो मसीहा नाम से मशहूर हैं
दुख गरीबों के कभी हरते नहीं।
भिड़ भी जाते हैं अगर भिड़ना पड़े
बेवजह तो हम कभी लड़ते नहीं
- रोहित कुमार 'हैप्पी'
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