हमको सपने टूटने का ग़म नहीं | ग़ज़ल

रचनाकार: रोहित कुमार 'हैप्पी'

हमको सपने टूटने का ग़म नहीं
अपने ही वादों में था कोई दम नहीं

माना तुम भी जिंदगी से खुश नहीं
गम मेरे हिस्से में भी कुछ कम नहीं

काँटे दुनिया लाख रख दे राहों में
पांव सकते मेरे बढ़ते थम नहीं

दिल से रोया होगा उनको याद कर
आँख थी 'रोहित' की बिल्कुल नम नहीं

- रोहित कुमार 'हैप्पी'