यह कैसे संभव हो सकता है कि अंग्रेजी भाषा समस्त भारत की मातृभाषा के समान हो जाये? - चंद्रशेखर मिश्र।
कल के सपने
बच्चे धरती के प्यारे हैं,
ये कल के सपने न्यारे हैं।
जीवन की चंचल नदिया के,
बच्चे अनमोल किनारे हैं।
जो हाथ पालते हैं इनको,
उनके ये सरस सहारे हैं।
आशाओं की फूलवारी के,
ये फूल सभी को प्यारे हैं।
कल के, परसों के, बरसों तक,
ये बालक पालनहारे हैं ।
ये बालक ही ऐसे सैनिक,
जो नहीं किसी से हारे हैं।
-सरस्वती कुमार 'दीपक'
प्रतिक्रियाएं (Comments) - 0
टिप्पणी लिखें (Write a Comment)