राष्ट्रीय एकता की कड़ी हिंदी ही जोड़ सकती है। - बालकृष्ण शर्मा 'नवीन'
वसुधा की जीवन रेखा (कथा-कहानी)  Click to print this content  
Author:गीता चौबे गूँज

"अरे! सुना तुमने? वसुधा वेंटिलेटर पर है।"--मंगल के मुख से यह सुनकर शनि हतप्रभ था।

पूरे सौर-मंडल में हड़कंप मचा हुआ था। सभी ग्रह चिंतित थे कि वसुधा की जीवन-लीला समाप्त हो गयी तो उसके बच्चों का क्या होगा? सभी बेमौत मारे जाएँगे।

शुक्र जो स्वभाव से ही गरम-मिज़ाज था, गुस्से से लाल होता हुआ बरस पड़ा, "उसके बच्चों ने ही तो उसकी यह हालत कर डाली है। अब भुगतें! अच्छा हुआ कि हम जीवनरहित हैं वरना हमारा भी वही हाल होता जो आज वसुधा का है।"

"अरे! ऐसा न कहो। हमारे सौर-मंडल में एक वसुधा ही तो है, जो इतनी ख़ूबसूरत है। जहाँ पर जीवन है, हरियाली है। जल है, वायु है, ख़ुशियाँ हैं। हमें प्रार्थना करनी चाहिए कि वह जल्दी से ठीक हो जाए।"--जुपिटर भी इस ऑनलाइन कॉंफ्रेंस में शामिल हो गया था।

तभी सभी के मोबाइल पर एक मेसेज फ्लैश हुआ--

वृक्षों से बनी दवाइयाँ और ऑक्सीजन चढ़ाने से वसुधा की जीवन-रेखा की वक्रता रफ़्तार पकड़ने लगी है…

"थैंक गॉड! अब पृथ्वी पर जंगलों की अनिवार्यता मनुष्यों को समझ आ गयी होगी।" सूर्य ने भी चैन की साँस ली।

- गीता चौबे 'गूँज'

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