अपनी सरलता के कारण हिंदी प्रवासी भाइयों की स्वत: राष्ट्रभाषा हो गई। - भवानीदयाल संन्यासी।
सीमा की कविताओ में ऋजुता है – राहुल देव (विविध)  Click to print this content  
Author:भारत-दर्शन समाचार

पुस्तक विमोचन गुरुग्राम

2 फरवरी 2022 (भारत): दिनांक 30 जनवरी 2022 को अपराह्न 12:30 बजे भारत दर्शन हिंदी साहित्यिक पत्रिका (न्यूज़ीलैंड) द्वारा आयोजित डॉ सीमा अग्निहोत्री चड्ढा 'अदिति' के काव्य संग्रह "मिल जाएंगे पंख तुम्हें भी" (काव्यमंजरी) का विमोचन क्लब फ्लोरेंस, सुशांत लोक, गुरुग्राम, हरियाणा में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता आजतक के जाने-माने सीनियर जर्नलिस्ट श्री राहुल देव जी द्वारा की गई। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में पधारे हिन्दी साहित्य जगत के दिग्गज कवि डॉ प्रेम जनमेजय ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए कवयित्री को अपने अमूल्य आशीर्वचन दिए व उनके संगठित परिवार को ही उनकी इस उपलब्धि का मूलभूत कारण बताया। भारत सरकार शिक्षण मंत्रालय शिक्षा मंडल के सदस्य प्रोफेसर राजेश कुमार जी की विशेष उपस्थिति तथा काव्यसंग्रह के लिए मुक्तकंठ से की उनकी सराहना ने कार्यक्रम को चार चांद लगा दिए। 

कवयित्री ने अपने लेखनजीवन की प्रारम्भिक यात्रा उन्हीं की छत्रछाया में प्रारम्भ करते हुए अनेक शैक्षणिक सामग्रियों की रचना की है व उनके संरक्षण में अपनी लेखनी को परिमार्जित किया है। पुस्तक के प्रकाशक व स्वयं समर्थ कवि डॉ संजीव  के सान्निध्य ने कार्यक्रम में उस समय नई ऊर्जा का संचार किया जब उन्होंने कवयित्री की कृतियों की तुलना छायावादी कवियों की श्रेणी में अग्रगणी कवयित्री महादेवी वर्मा से कर दी। कवयित्री के लेखन के बहुआयामी पक्ष को उजागर करती कविताओं की चर्चा करते हुए इस अवसर पर उपस्थित प्रतिष्ठित कवयित्रियों सुश्री किरण यादव व श्रीमती मोनिका शर्मा ने कवयित्री की रचनाओं को सच्ची रचनाएं कहा व कवयित्री को भगवान बुद्ध के समीप पाते हुए उनकी कविताओं में उद्धृत 'निर्वाण' शब्द के माध्यम से उन्हें अध्यात्म की ओर अग्रसर पाया। कवयित्री की कवितायात्रा उनकी प्रथम कविता में आसमान में उड़ान भरने का स्वप्न देखती, मन में पंखों की लालसा रखती एक नन्हीं सहमी बालिका से आरंभ होकर अन्ततोगत्वा जीवन की निस्सारता को समझ, अपने अहंकार का त्याग करने वाली एक परिपक्व प्रौढ़ा के शब्दों में "अहम् ब्रह्मोऽस्मि" कविता तक पहुंच विराम लेती है। कवयित्री का एक कोमल बालिका से एक परिपक्व प्रौढ़ा में परिवर्तित होते चरित्र का यह उठान उनके जीवन में घटित विभिन्न घटनाओं की ओर इंगित करते हुए उनके परिपक्व दृष्टिकोण का उल्लेख करता है, ऐसा कहते हुए श्रीमती किरण यादव जी ने पुस्तक की समीक्षा को एक अलौकिक आध्यात्मिक स्तर प्रदान किया। 

सभा में उपस्थित दिल्ली एन सी आर क्षेत्र सचदेवा पब्लिक स्कूलों की विभिन्न शाखाओं के प्रबंधक व शिक्षाविद् श्री अनिल सचदेवा जी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते हुए कवयित्री तथा काव्य संग्रह की प्रशंसा में उदार हृदय से अपने उद्गार व्यक्त किए व अपने बचपन के कुछ किस्से व शरारतें श्रोताओं के साथ साझा कीं। सुशांत लोक रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की महासचिव श्रीमती सुदक्षिणा लाहा ने मुक्त कंठ से कवयित्री तथा उनकी पुस्तक की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक सजग व सहायक पड़ोसी कहा। शाश्वत काव्यधारा साहित्यिक मंच की संचालिका डॉ कमलेश नागर 'शिखा' ने कवयित्री को अपनी असीम शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए अपने साथ बिताए मधुर पलों की कुछ अविस्मरणीय यादों के पुष्प खिला वातावरण को महका दिया। इस अवसर पर कार्यक्रम में उपस्थित श्री शरद नागर (सूचना एवं प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ) ने कवयित्री को उनकी पुस्तक की अपार सफलता के लिए अनन्त शुभकामनाएं प्रेषित कीं। कवयित्री ने इसी पुस्तक से उद्धृत अपना स्वरचित गीत गाते हुए अपने मधुर कंठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।  

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री राहुल देव जी ने काव्यमंजरी की भूरि भूरि प्रशंसा करते हुए कवयित्री को अनन्त शुभकामनाएं प्रेषित कीं व ससीम से असीम को प्राप्त करती उनकी कविताओं की सशक्तता बयान कर उन्हें साहित्य जगत में एक और सशक्त हस्ताक्षर का पदार्पण कह उनका  स्वागत किया और उनकी कविताओं को जनमानस की कविता कह कर उनमें पाई जाने वाली ऋजुता का उल्लेख किया। उनके अनुसार कवयित्री की कविताएं सीधे पाठक के हृदय में उतर अपना विशिष्ट स्थान बनातीं हैं और पाठक उनकी कविताओं में स्वयं की झलक प्राप्त कर सकता है।अपने आशीर्वचनों से राहुल देव जी ने कवयित्री तथा उपस्थित श्रोता गण का पथ प्रशस्त किया। सुश्री मधुमीत कौर (अधिवक्ता तथा कवयित्री) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। श्रीमती आभा सिंह ( संपादक लोकसभा सचिवालय)का कुशल तथा जीवंत संचालन सराहनीय रहा।

[भारत-दर्शन समाचार]

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