हिंदी का काम देश का काम है, समूचे राष्ट्र निर्माण का प्रश्न है। - बाबूराम सक्सेना
बुराई का जोर बुरे पर  (कथा-कहानी)  Click to print this content  
Author:दीन दयाल भार्गव

दो भाई थे। एक भूत की पूजा करता था, दूसरा भगवान की। भूत भगवान की पूजा करने वाले भाई को नाना प्रकार के लोभ-प्रलोभन दिखाता था, जिससे वह उसकी ओर आकृष्ट हो; परन्तु जब वह भाई इनसे विचलित नहीं हुआ तब वह भूत उसे तरह-तरह से डराने लगा। परन्तु जब इससे भी वह भाई अपनी भगवद्भक्ति में अटल रहा, तब तो भूत बड़ा निराश हुआ। एक दिन भूत ने अपनी पूजा करने वाले भाई को स्वप्न दिया और कहा, "देख तू अपने भगवान की पूजा करने वाले भाई को मना ले वरना तुझे मार डालूगा ।"

भूत-भक्त भाई ने कहा, "वाह, यह खूब रही! मैं तुम्हारी पूजा करूँ और तुम मुझे ही मारो।"

भूत ने कहा, "क्या करूँ, मेरा वश तुम्हारे ऊपर ही चलता है, क्योंकि वह दूसरा तो मुझे मानता ही नहीं।"

शैतान का जोर शैतान पर ही चलता है जिसमें शैतानियत नहीं, उसका शैतान क्या बिगाड़ सकता है। काम, क्रोध, लोभ ही बड़े शैतान है। गीता में इन्हीं तीनों को नरक के द्वार बताया गया है, परन्तु इन तीनों में से एक को भी जो अपने अन्दर घर करने नहीं देता उसका कोई क्या बिगाड़ सकता है?

- दीन दयाल भार्गव 

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